भावुक उपहार
सुखीराम बाबा और पुष्पा दादी दोनो एक बुजुर्ग दंपत्ति थे। दुर्भाग्य से उनके कोई संतान भी नहीं थी। वर्षों से एक झोपड़ी में रहकर जैसे तैसे जीवन यापन कर रहे थे। बाबा मजदूरी करते थे तो दादी कोई छोटा मोटा काम करती जिससे की दो वक़्त की रोटी इज्ज़त से खाने में बाबा की मदद कर पाये। आज के युग में भी न ही बिजली का कनेक्शन न ही की टेलीफोन की सुविधा और तो और खाना भी लकड़ी बीन कर लाने पर ईंट के चूल्हे पर बनता था। बाबा और दादी का प्रेम और जिंदा दिली देखो तो उनका चेहरा आँखों के सामने से जाता ही नहीं है उनकी मजबूरी ये कि पहनने को पांव में चप्पल नहीं , लेकिन ख़ुद्दारी ये कि हाथ किसी के आगे नहीं फैलाया।
अचानक टिस्कु की जब मुलाक़ात बाबा दादी से होती है तो बाबा मैले फटे कुर्ते धोती में और दादी एक सूती साडी में जो कई जगह से सिली हुई थी। टिस्कु ने जब उनको देखा तब तक वो अपनी अवस्था के कारण कुछ भी मेहनत का काम नहीं कर सकते थे।बाबा दफ्तर में बहुत हिम्मत करके एक उम्मीद से दादी की ज़िद पर पंहुचे। वहां टिस्कु ने कुर्सी पर बिठाया पूँछा बाबा बताइए मैं आपकी का साहयता कर सकता हूँ। दादी बोली बड़े लाड़ और धीमी आवाज़ से बोली मैंने सुना है बेटा गैस और बिजली के कनेक्शन मुफ़्त में हो रहे हैं अब बूढ़े हाथों से लकड़ी बीनी नहीं जाती और हाथ भी जल जाते हैं ।बड़ा मुश्किल होती है। तुरन्त ही टिस्कु ने उन्हें सांत्वना दी कि अगर आपके पास कनेक्शन नहीं है तो जरुर आपको मिलेगा। और आधार कार्ड से चेक किया तो पाया उनके मोहल्ले का जमींदार उनके नाम पर वर्षों से कनेक्शन चला रहा है। वो लोग ये सोंचने लगे शायद इन्हें रिश्वत चाहिए इसीलिए झल्ला कर चले गए। टिस्कु के बारे मे भला बुरा सोंचते रहे। टिस्कु ने कार्यवाही करके वो सिलेंडर वापस करा लिया और पूरा कनेक्शन चूल्हे के साथ बाबा दादी को स्वयं घर दिया जाकर। और बताया कि आपके काग़ज़ मकान बनाने की किश्त के बहाने से जमींदार साहब ने लिये और उस पर कनेक्शन निकलवा लिया। ये सब देखते सुनते ही दोनों लोगों की आँखें नम थी । टिस्कु को बहुत दुआएं दी और सिर पर हाथ रखकर कहा बेटा जब बहुत कुछ कहने को होता है तो इंसान अक्सर खामोश हो जाता है।
ये मेरे जीवन का सबसे भावुक उपहार है।
खुश रहो।
ये उनके जीवन का सबसे कीमती तोहफ़ा था।
दोस्तों, संवेदनशीलता या sensitivity एक बहुत बड़ा मानवीय गुण है। दूसरों के दुखों को महसूस करना और उसे कम करने का प्रयास करना एक महान काम है
आइये हम भी अपने समाज, अपने आस-पड़ोस, अपने यार-मित्रों-अजनबियों सभी के प्रति संवेदनशील बनें…।
आइये हम भी किसी की बिना स्वार्थ बिना किसी अपेक्षा के मदद करें और दुःख से भरी इस दुनिया में कुछ खुशियाँ फैलाएं।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
- रुद्रांश त्रिगुणायत